संदेश

गोण्डी रियासत

चित्र
 गोण्डी रियासत * शेन्दरी गढ * तुन सेवा सेवा  🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 18 वी शताब्दी मे  भोसले ने इस पर  कब्जा किया  कयियो गोण्डी किले महलों की तरह इसमें भी  पूरे छेत्र में  और गोण्डी राजा के महल में  , आर्य पुत्र राम सीता लक्षमण, हनुमान की मूर्तियां स्थापित की और इसका नाम  *    राम टेक   *    तहसील   रामटेक , जिला  नागपुर महाराष्ट्र   -    कर दिया  ,  जो  आज भी प्रचलित है   , 18 वी शदी के पहले हजारों सालों से गोण्डी राजाओ का शासन था  ,   यहाँ  आखरी गोण्डी  राजा    शेन्दरी गढ  रियासत के कोड्या गोण्ड  हुए थे  🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵 इस पूरे छेत्र में  , गोण्डवाना  राज चिन्ह  बिखरे  हुए हैं  ,  छेत्र  के  गोण्डी गाथाओं में   आज भी  गोण्डी जन  इसे  टोन्गी महल के नाम से  याद  करते हैं  , टोन्गी को ही मराठी में  दगड़...

गोंडी संस्कृति

चित्र
 अति प्राचीन गोंडी संस्कृति को जोहार सेवा 🙏🙏 इसे गोंडी बोली मे  धुर्रा पड़ेक यानी धुर्रा बीज बोलते हैं ,गोमची भी कहते हैं ================================= हिंदी में इसे  गुंजा बीज कहते हैं गोंडवाना के जंगलों में यह अल्प संख्या में पाये जाते हैं , अक्सर गोंडी गांव के आसपास होते हैं  ये दो तरह के होते हैं ,लाल और सफेद  यह वेली यानी बेल प्रजाति का पौधा है  गोंड समाज और हमारे बैगा जन  , इसके बीज और जड़ का उपयोग औषधि के रूप में कयी तरह से करना जानते थे, हैं , आर्य आगमन से पहले से ही कर रहे हैं अक्सर ग्रामीण जन इसके बीज बच्चे के कमर मे बांधते हैं , नजर ना लगे , दांत अच्छे से निकल जाएं करके  और लू लगने पर जड़ को पीसकर पिलाते , मैंने देखा है ,कितनी मात्रा में यह याद नही है , इस भूमि की प्रथम विकसित सभ्यता गोन्डी सभ्यता को जोहार जोहार सेवा सेवा 💞🙏💞 #पवन_परते जो गोंडवाना वनस्पति विलुप्त हो रही है , क्रपया उसे बचाने का प्रयास कीजिए , जून में गोंडवाना पेड़ों की व्रच्छारोपण कीजिए आदरणीय सगा जनों 🙏🙏

आदिवासी इतिहास

चित्र
 शिकार करना ट्राईबल संस्कृति है  ट्राईबल समाज में 98 % लोग मांसाहारी होते हैं , और 2 % शुद्ध शाकाहारी होते हैं  अब तो , कारपोरेट घरानों को , उत्खनन के लिए  दे कर भारत के  खरबों टन आक्सीजन उत्पादक जंगल 40 %  समाप्त हो गये हैं  और शिकार का रिवाज लगभग विलुप्त हो रहा है =========================== आज भारत मांस निर्यात में नंबर वन पर है इन फैक्ट्रियों में रोज हजारों जानवर कटते हैं इनमें एक भी फैक्ट्री इंडीजीनस मूल बीज गोंड की नहीं है ,सैवन स्टार,फाईव स्टार हजारों होटल्स में रोज लाखों जानवर कटते हैं यह भी किसी गोंड का नहीं है ट्राईबल समाज कभी मांस का व्यापार नहीं करता  =============================≠== चित्र ÷ मध्य गोंडवाना में ,   सूपखार जिला मंडला मध्य प्रदेश में  खुदाई से प्राप्त एक शिलालेख  यह 15 वी शताब्दी का बताया गया है  -