गोण्डी रियासत
- गोण्डी रियासत * शेन्दरी गढ * तुन सेवा सेवा
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18 वी शताब्दी मे
भोसले ने इस पर कब्जा किया
कयियो गोण्डी किले महलों की तरह इसमें भी
पूरे छेत्र में और गोण्डी राजा के महल में , आर्य पुत्र राम सीता लक्षमण, हनुमान की मूर्तियां स्थापित की और इसका नाम * राम टेक * तहसील रामटेक , जिला नागपुर महाराष्ट्र - कर दिया , जो आज भी प्रचलित है
,
18 वी शदी के पहले हजारों सालों से गोण्डी राजाओ का शासन था , यहाँ
आखरी गोण्डी राजा
शेन्दरी गढ रियासत के कोड्या गोण्ड हुए थे
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इस पूरे छेत्र में , गोण्डवाना राज चिन्ह बिखरे हुए हैं , छेत्र के गोण्डी गाथाओं में आज भी गोण्डी जन इसे टोन्गी महल के नाम से याद करते हैं , टोन्गी को ही मराठी में दगड़ी बोलते हैं ,इसलिए इसे दगड़ी महल भी कहते हैं
कोड्या गोण्ड राजा ने सभी धर्मों को
खुद के रियासत मे आश्रय दिया था , शायद यही उनकी सबसे बड़ी गलती थी
कि आज गोण्डी इतिहास को सब ने दफन कर दिया है
इस टीले के पूर्व दिशा में
सभी गोण्डी राजाओ के महलों की , येर पेन को स्थापित करने की विधा के अंतर्गत
एक ताल है जिसमें पूरे समय पानी रहता है
इसका नाम याया ना ठीया है -- जिसे बिगड़ा हुआ रूप , अंबाडा ताल के नाम पर आज प्रसिद्ध है
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आर्यों ने
इसके बारे में कयी काल्पनिक कहानी और ग्रन्थ लिखें है
जिनका आलोचनात्मक विश्लेषण
नागपुर महाराष्ट्र के , पेन वासी वेंकटेश आत्राम जी के ग्रन्थ मे है
लेकिन
यहाँ पर आज भी उपलब्ध गोण्डी चिन्ह , चीख चीख कर हमें बता रहे हैं कि
यह गोन्डो का गढ है , कोयताड़ सुशीला धुर्वे





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