आदिवासी इतिहास
शिकार करना ट्राईबल संस्कृति है
ट्राईबल समाज में 98 % लोग मांसाहारी होते हैं , और 2 % शुद्ध शाकाहारी होते हैं
अब तो , कारपोरेट घरानों को , उत्खनन के लिए दे कर भारत के खरबों टन आक्सीजन उत्पादक जंगल 40 % समाप्त हो गये हैं
और शिकार का रिवाज लगभग विलुप्त हो रहा है
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आज भारत मांस निर्यात में नंबर वन पर है इन फैक्ट्रियों में रोज हजारों जानवर कटते हैं इनमें एक भी फैक्ट्री इंडीजीनस मूल बीज गोंड की नहीं है ,सैवन स्टार,फाईव स्टार हजारों होटल्स में रोज लाखों जानवर कटते हैं यह भी किसी गोंड का नहीं है
ट्राईबल समाज कभी मांस का व्यापार नहीं करता
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चित्र ÷ मध्य गोंडवाना में , सूपखार जिला मंडला मध्य प्रदेश में

JAY GONDWANA
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